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स्व.पूज्य तन सिंह जी की कलम से
यहाँ लिखे लेख स्व.पूज्य तन सिंह जी द्वारा लिखित पुस्तको से साभार लिए गए है | जिसका उद्देश्य स्व. तन सिंह जी द्वारा लिखित साहित्य क्षत्रिय युवको तक पहुँचाना मात्र है |
10-23-09
द्रश्य पट पर कई चित्र आये , उभरे और बदलते गए | में तो
इतना तल्लीन हो गया कि याद ही नहीं रहा कौन कब आया और क्या कर चला गया |
इन द्रश्यों के बीच मैंने और भी कई द्रश्य देखे थे | कभी महाराणा कुम्भा
...
10-27-09
चित्रपट चल रहा था द्रश्य बदल रहे थे इन्ही द्रश्यों में मैंने देखा मैंने सिरोही के राव अखैराज को देखा जिसने जालौर में गुजरात के सुल्तान की और से रहने वाले पालनपुर के बुजुर्ग मजाहिद खान
को कैद किया...
10-29-09
चित्रपट चल रहा था द्रश्य बदल रहे थे इन्ही द्रश्यों में मैंने देखा मेने तलवारे चलती देखि | अपने पैत्रिक और परम्परागत राज्यधिकारों की पुनः प्राप्ति के लिए मैंने राव सीहा की
तलवार देखि , राव चुंडा क...
11-01-09
चित्रपट चल रहा था द्रश्य बदल रहे थे इन्ही द्रश्यों में मैंने देखा मैंने
भारत की उत्तर दिशा के किवाडो को देखा जो पहली बार गजनी के किले में लगाये
गए थे | फिर स्यालकोट और भटनेर में लगाये गए | फिर क...
11-03-09
चित्रपट चल रहा था द्रश्य बदल रहे थे इन्ही द्रश्यों में मैंने देखा
एक दिन मैंने काका भतीजा की सलाह पर एक ताना सुना और देखा कि उस ताने पर पुरुषार्थ अंगडाई लेकर उठ खडा हुआ | मैंने बीदा को युक्ति से ...
11-04-09
चित्रपट चल रहा था द्रश्य बदल रहे थे उन्ही द्रश्यों में मैंने देखा मैंने मोकल के पुत्र राव शेखा को देखा जिसके बल विक्रम से नए राज्य की नीव लग रही थी | साथ ही मैंने बीस सवारों के साथ रायसल दरबारी को...
11-06-09
चित्रपट चल रहा था द्रश्य बदल रहे थे उन्ही द्रश्यों में मैंने देखा
पहाडियों से घिरे आम्बेर दुर्ग को देखा | उस दुर्ग के प्रतापी और यशस्वी सिपहसालारों को देखा जिन्होंने समुद्र में खांडा धोया और काबु...
11-10-09
चित्रपट चल रहा था द्रश्य बदल रहे थे उन्ही द्रश्यों में
मैंने किले देखे | विजयपाल को सन १०४० में बयाना का किला बनाते देखा जिसमे उसने गजनी के अबुबक्र बुखारी का तीखी तलवारों से स्वागत किया | मैंने प...
11-12-09
चित्रपट चल रहा था द्रश्य बदल रहे थे उन्ही द्रश्यो में मैंने देखा
अकेले देवा हाडा को देखा जिसने अपने भुज-बल और युक्ति से बूंदी पर आधिपत्य किया | बांके सूरजमल हाडा को कर्त्तव्य के लिए मरते - मारते ...
11-16-09
चित्रपट चल रहा था द्रश्य बदल रहे थे उन्ही द्रश्यों में
शाहपुरा के संस्थापक सुजान सिंह को मैंने कंधार में पठानों का खून बहते देखा | मुगलिया सल्तनत को ख़त्म करने के लिए उसी सूजान सिंह को जसवंत सिंह...
12-30-09
चित्रपट चल रहा था दृश्य बदल रहे थे उन्ही दृश्यों में मैंने
रावल भीमा को देखा जिसने राज्य सत्ता की महत्त्वाकांक्षा हल चलाते हुए भी
पूर्ण करली तथा कच्छ का राज्य हस्तगत कर लिया | मैंने रावल जाम देख...
12-30-09
चित्रपट चल रहा था दृश्य बदल रहे थे उन्ही दृश्यों में
मैंने घोडे देखे | सामन्त सिंह के घोडे देखे जिसने गुजरात तक अपनी सीमाएं बढाकर अजयपाल सोलंकी को परास्त किया | उन्ही घोडों से मैंने बागड़ में एक ...
01-08-10
चित्रपट चल रहा था दृश्य बदल रहे थे उन्ही दृश्यों में मैंने
घोडे देखे | सामन्त सिंह के घोडे देखे जिसने गुजरात तक अपनी सीमाएं बढाकर
अजयपाल सोलंकी को परास्त किया | उन्ही घोडों से मैंने बागड़ में एक...
01-08-10
चित्रपट चल रहा था दृश्य बदल रहे थे उन्हियो दृश्यों में अन्हिल्वाड़
पाटन को बसाते हुए मैंने चावड वनराज को देखा | पराक्रमी मूलराज सोलंकी को
देखा जिसकी वीरता की धाक पश्चिम के कथा कोट से लेकर उत्तर ...
01-19-10
साम्राज्य और स्वतंत्रता के बीच निर्णायक संग्राम चल रहा है और खानवा के युद्ध क्षेत्र में घोड़े दौड़ रहे है |बङगङां बङगङां बङगङां |' परन्तु मै कैसे सो रहा हूँ , कहाँ हूँ मै ? '' महाराणा आप कालपी ग्रा...
03-21-10
भाग १ से आगे ....
' महाराणा ! मेवाड़ के सरदार आए है , आपके चरणों का कुशल पूछने |'
'उन्हें कह दो लौट कर चितौड़ चले जाएँ और कुशल पूछें अपनी आयु और परिवार का | मुझपर सारंगदेव का अहसान था | पृथ्वीराज...
03-21-10
भाग १ व भाग २ से आगे ......... ' किसका इलाज करोगे वैद्यजी ? विष का प्रभाव संभवत: आप हटा सकते है | शरीर पर लगे अस्सी घाव भी आपने ठीक किये है परन्तु मेरे दिल के घावों का उपचार करोगे ? उनमे तो अब मवा...
03-21-10
भाग -१ ,भाग-२ , भाग-३ का शेष ............... वैध ने गिडगिडाकर कहा - ' महाराणा ! यह बातें सब बातें छोड़ दीजिए , ईश्वर का नाम लेने का समय आ गया है | '
'अच्छी बात है | हे प्रभु ! हे ईश्वर एकलिंग नाथ ...
Copyright@2007Ravindra Shekhawat
